Monday, 26 June 2017

बस्ती

#बस्ती

सुनती हूँ मैं, लोगो को ,
उनकी अनगिनत चीखों में
दर्द से भरी, मरणांतक रूपो में
कुरेदती जमीं, ज़मीर ढांक रही है
भाई भाई की कब्र काट रही हैं
रिश्तों की सीलन बढ़ती जा रही है
है ....कुछ तो तुझ में और मुझ में
जो सबको दरिंदा बना रही है
छीलते पेड़ो की छाल देख कर
सहम जाती हूं लड़की की
खुलती छाती देख कर
निर्जीवों सी क्यों कर ये हवा हैं
अपनों पर बैठा ये कैसा दरिंदा हैं
ये कैसा बदबूदार बाज़ार खड़ा है
यहाँ हर कोई स्त्री का दलाल खड़ा है
कोख़ का सफर पूरा कर वो बाहर आती
पर पग पग खड़े भेडियों से नहीं बच पाती
बाप,बेटा, माँ, सब क़ातिल खड़े है
कौन गढ़ता है ये समाज, क्या मुर्दे खड़े है
क्यों मजबूरों की इतनी बस्ती हैं
जिस्मो के सौदों में मानवता
क्या इतनी सस्ती है
लहू बहता है अब अश्क़ो से
हर पहचान धुंधली लगती है
कौन अपना, कौन फ़रेबी है
चारों ओर वहशियों की बस्ती है
क्या योनि और छाती इतनी सस्ती हैं।

#Geetanjali

Thursday, 22 June 2017

बेहया के फूल

#बेहया_के_फूल

कुछ फूलों में होते है बेहया के फूल भी
जो दिखते है हरदम
गांव बाहर
उस गली के कोने से,
जो उपेक्षित है सभ्य समाज में,
बेहया के वो फूल
खो चुके है अपनी खुशबु
अनवरत रगड़ खाते खाते
बदलते सालो में वो बढ़ते गए
बिना खाद पानी के
जैसे बढ़ती है खरपतवार
रोज काली रात में, उस गली की कोख़ में
रोपे जाते है अतृप्त वजूद के तृप्ति के बीज
खिल जाता है एक और बेहया का फूल
हर कोई देखता है उस ओर, पर ठहरता कोई नहीं
वो न देवता के लिए है, ना है किसी शुभता के लिए
वो तो बने है हर रात के लिए
बिना भाव व स्पंदन के बिछ जाने के लिए
रात आती है रोज उस गली में
अपने नंगेपन के साथ ,
उसे और नंगा कर जाती है
बेहया पैदा होते है रात में,
फिर तिल तिल मरते भी है हर रात में
शाम होते ही वो बेहया के फूल खिल जाते है झुंडों में
अपने नए ग्राहक के इंतज़ार में........

#Geetanjali
21/6/2017

Friday, 26 May 2017

दामिनी

बहने दो मुझे लहू की तरह
पिघलने दो मुझे चट्टान की तरह
मुझ में धरा की धार है
मुझ में चट्टान सा साहस है
दो आँखे और ज़िस्म से ऊपर हूँ
निःवस्त्र कर दो फिर भी औरत हूँ
कंदराओं में मुझे रहने दो
जटाओं सा मुझे बनने दो
आलौकिक प्रकाश से भर दूंगी
जब जब इस धरा पर जन्म लुंगी
जननी हूँ, अंबर से विशाल हूँ
तेरे भाल का चमकता काल हूँ
तोड़ दो मुझे कई टुकड़ो में
हर टुकड़े में जीवन भर दूंगी
सृजन कर पूरी सृष्टि रच दूंगी
क्या हुआ जो घिर गई हूँ मैं
कुछ पापी आताताइयों से
मुझको अपनी ताकत को परखने दो
दो स्तनों और योनि से नहीं हूँ, मै बंधी
मुझ में है दिव्य तीनो सृष्टि
अंबर पाताल धरा हूँ मैं
हिमालय की अप्सरा हूँ मैं
मेरे दिव्य रूप को सजने दो
मेरे अवचेतन को गढ़ने दो
विशाल भुजाओं से मुझको
संसार का आलिंगन करने दो
हरियाली का चुम्बन लेने दो
हुँ औरत, औरत ही रहने दो....... Geetanjali

#सिपाही

जवानों के घर में भी, कभी झाँका है
देखा है कभी, क्या वहाँ फांका है
बाते बड़ी बड़ी कहा चूल्हे में जलती है
माँ की छाती बेटे के लिए तरसती है
सीमा पर खड़ा सिपाही सबका बेटा है
क्या कभी तुमने,
उसकी विधवा की आँखों में देखा है
फीता काटता नेता/नायक तुम ने चुना है
क्या बॉडर पर बहाया, उसने खून पसीना है?
सिपाही कभी नहीं बॉडर पर सोता है
तब कही जा कर तुम्हारा सीना चौड़ा होता है
कोई सरकार ने परिवार उसका गोद उठाया है?
विदेशों में केवल लुटती माया है
उस दर्द को पी कर देखो तुम भी
छाती में खंज़र खा के देखो तुम भी
सिपाहियों को दिल में बैठाना जरुरी है
उनके अनाथ बच्चो को अपनाना ज़रूरी है
मत भूलो कि...... ये फ़ौज की ही ताकत है
कि तुम्हारे घरों से मौत की अभी दुरी है..........

#Geetanjali
26/5/2017


हृदय विदारक चित्कार
आज चीर देंगी आसमान
ऐ धरा तू फट जा , नीर बहा
आँसुओ में बहती माँ की लाज बचा
मेरी कोख़ को आज तू दे दे जीवनदान
दो बूंद है मेरी जरुरत, कैसे दे दूँ
इतनी बड़ी कीमत
भटक गई हूं इस मरू में
बिखर रही है सारी आशा
बेरहम मर्दो की दुनिया में
टूट रही है मेरी काया
शतरंज पर बिछी है
बाजारों में बिक रही है
घर की लाज बेचारी
सांसे टूट रही है
आस है अब बाकि
कोई चमत्कार हो
गूंजा से मेरी कोख़ की
किलकारी
सांसो पर ममता है भारी......... Geetanjali

तू चंड है........
तू प्रचंड है......
तू है वेग धारिणी....
तू है धरा विशाल......
गगन से ऊँचा है तेरा भाल
डगमग धरती डोले
जब तू अपना रूप खोले
तू दामिनी
तू गजगामिनी
तू सृष्टि की रचनाकार
पग पग तेरे संघर्ष हजार
आँगन से अंतरिक्ष तक तू है छाई
तू कोमल तुझमे श्रद्धा है अपार
जब जब मानवता ने नारी को मसला
रणचंडी बन तूने शीश उसका कुचला
पौरुष के दंभ में मत कर तू उसका अपमान
नहीं तो.... मिटा दिए जाएंगे तेरे निशान
इतिहास के पन्ने देते है यही गवाही
मर्यादा और धर्म की रक्षा के लिए 
हमेशा से तू शस्त्र उठती आई
साहस की है तू मिसाल
इतिहास को तू है रचती
वर्तमान की तू है साक्षी
भविष्य की है तू पहरेदार
रौंधी कुचली मसली जाती
तेरी जात को गाली दी जाती
फिर भी तू हमेशा 
मानवता को समर्पित मानी जाती
ऐसा है तेरा रूप विशाल 
तेरा आस्तित्व है विकराल
तू पोषक है मानव की
गर्भ में रखती सारा संसार........ Geetanjali

औरत: हवस

औरत: हवस: Wednesday 1 march 2017 #हवस हवस के है कई चेहरे घूमते है चेहरा बदल बदल के कभी गलियों में कभी महफ़िलों में करते मासूमो का शिकार फिर महफ़ि...